ऐसे कई प्रश्न थे मेरे मन में जिनके जवाब तुम्हारे पास थे तो , पर ना ही मैं उन्हें सुन्ना चाहता था और ना ही तुम बोलना .
सवाल थे और जवाब भी ... और फिर थी ज़िन्दगी , कुछ चाहनाए और कुछ सपने ; जो उन सवालों और जवाबों के वजूद को पूर्णतः नकार के अपने ही अंदाज़ में चलते चले जाते हैं .
दिख रही थी मुझे वो अपरिहार्य घडी , वह क्षण जब कुछ अनर्थ होने ही वाला था . उनको भी दिख रही थी तेज़ रफ़्तार से अपनी तरफ बढ़ती वह गाडी . पर कई बार रुकना मुमकिन नहीं हो पाता कबीर , वो मुस्कराहट और आसुओं के बीच से बोले .
कई बार हम समझदार नहीं होते , ज़िम्मेदार नहीं होते और जानते हुए भी बढ़ते हैं दुर्घटना की तरफ .
How tragic things are at times. How I wish there were better way for things to be for me to be...
सवाल थे और जवाब भी ... और फिर थी ज़िन्दगी , कुछ चाहनाए और कुछ सपने ; जो उन सवालों और जवाबों के वजूद को पूर्णतः नकार के अपने ही अंदाज़ में चलते चले जाते हैं .
दिख रही थी मुझे वो अपरिहार्य घडी , वह क्षण जब कुछ अनर्थ होने ही वाला था . उनको भी दिख रही थी तेज़ रफ़्तार से अपनी तरफ बढ़ती वह गाडी . पर कई बार रुकना मुमकिन नहीं हो पाता कबीर , वो मुस्कराहट और आसुओं के बीच से बोले .
कई बार हम समझदार नहीं होते , ज़िम्मेदार नहीं होते और जानते हुए भी बढ़ते हैं दुर्घटना की तरफ .
How tragic things are at times. How I wish there were better way for things to be for me to be...